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जौनपुर में धनंजय सिंह के दावे फेल, दोनों सीटों पर दौड़ी साइकिल

जौनपुर में धनंजय सिंह के दावे किसने फेल किये?

बीते लोकसभा चुनाव में जौनपुर (Jaunpur) जिले की दोनों लोकसभा सीटों (जौनपुर और मछलीशहर) में चुनावी माहौल कुछ अलग ही दिखा। कभी गेंद इस पाले में तो कभी उस पाले में जाती दिखी। आखिरकार जौनपुर लोकसभा सीट से सपा प्रत्याशी बाबू सिंह कुशवाहा ने भाजपा प्रत्याशी को जबरदस्त शिकस्त देते हुए जीत दर्ज की।

दरअसल, लोकसभा चुनाव को लेकर जौनपुर में राजनीति खूब गरमाई थी। जौनपुर (Jaunpur) जिले की राजनीति के केंद्र में एक बार फिर जौनपुर के पूर्व सांसद और बाहुबली नेता धनंजय सिंह रहे। चुनाव के ठीक पहले भाजपा के करीब जाने के बाद कृपाशंकर सिंह की जीत का दावा करते रहे। लेकिन, जनता ने तब तक अपना मन बना लिया था कि इन दोनों सीटों पर उसे किसको चुनना है।

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जो कि चुनाव परिणाम के बाद साफ हो गया। बाबू सिंह कुशवाहा ने जौनपुर सीट पर 99,335 वोटों के बड़े अंतर से जीत अपने नाम की। बाबू सिंह कुशवाहा को इस चुनाव में 5,09,130 वोट मिले। वहीं, भाजपा के कृपाशंकर सिंह 4,09,795 वोट हासिल करने में कामयाब रहे किन्तु यह उनकी जीत के लिए नाकाफी थे।

निवर्तमान सांसद बसपा के श्याम सिंह यादव को यहाँ से महज़ 1,57,137 पाकर तीसरे स्थान पर रहे।

पूर्व में प्रतीत हो रहा था त्रिकोणीय मुकाबला

पूर्वांचल के बाहुबली नेता और जौनपुर (Jaunpur) के पूर्व सांसद धनंजय सिंह को मार्च महीने में 7 साल जेल की सजा सुनाई गई थी। हालांकि, मतदान से ठीक पहले उन्हें बेल मिल गयी, उस समय तक उनकी पत्नी श्रीकला रेड्डी चुनावी मैदान में उतर चुकी थीं।

बहुजन समाज पार्टी अध्यक्ष मायावती ने उन्हें टिकट दिया था। लेकिन, धनंजय सिंह के जेल से बाहर आते ही बसपा का रुख बदला। बसपा प्रमुख मायावती ने धनंजय सिंह की पत्नी श्रीकला का टिकट काटकर निवर्तमान सांसद श्याम सिंह यादव को एक फिर से चुनावी मैदान में उतार दिया।

भाजपा के कृपा शंकर सिंह और समाजवादी पार्टी के बाबू सिंह कुशवाहा के बीच मुकाबले को त्रिकोणीय बना रही श्रीकला रेड्डी चुनाव से बाहर थी, मायावती के निर्णय के बाद माहौल बदलने लगा। श्रीकला के पक्ष में बन रहा माहौल गड़बड़ाया तो भाजपा फायदे में आती दिखी।

वहीं, सपा के बाबू सिंह कुशवाहा भी परंपरागत वोट बैंक के साथ चुनावी मैदान में अपनी स्थिति मजबूत करने में जुटे रहे। हालांकि, बसपा के श्याम सिंह यादव को लेकर क्षेत्र में अलग ही चर्चा थी, माना जा रहा था कि वे बसपा के कैडर वोट बैंक के साथ यादव वोट बैंक में सेंधमारी कर सकते हैं।

ऐसे में सपा का खेल खराब हो सकता है किंतु ऐसा बिल्कुल भी नहीं हुआ और निवर्तमान सांसद और परिवर्तित बसपा प्रत्याशी इस सीट पर तीसरे स्थान पर रहे ।

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ब्राम्हण बाहुल्य जौनपुर (Jaunpur) में बाबू सिंह कुशवाहा ने तोड़ा तिलिस्म

जौनपुर (Jaunpur) लोकसभा सीट पर चुनावी गणित जातीय समीकरणों के बीच उलझा हुआ दिखाई दिया, इस सीट पर सर्वाधिक आबादी ब्राह्मण मतदाताओं की है, 2019 के लोकसभा चुनाव के अनुमानित आंकड़ों के अनुसार, इस सीट पर करीब 2,43,810 ब्राह्मण वोटर थे।

तो वहीं दूसरे स्थान पर अनुसूचित जातियों के वोटरों की संख्या है, इनकी संख्या 2,31,970 के आसपास है। वहीं, तीसरे नंबर पर मुस्लिम वोटरों की संख्या 2,21,254 और राजपूत वोटरो की संख्या 1,91,184 के करीब है। इस जातीय गणित के बाद भी जौनपुर (Jaunpur) में मुख्य चुनावी मुकाबला राजपूत और यादवों के बीच होता रहा है।

1990 के बाद से तीन दशकों में हुए चुनाव में चार बार यादव तो चार बार ही राजपूत उम्मीदवार ने जीत का परचम लहराया है। इस बार राजपूत और कुशवाहा उम्मीदवार आमने-सामने हैं तो यादव उम्मीदवार मुकाबले को त्रिकोणीय बनाने की कोशिश में थे।

किंतु वह नाकाम साबित हुए और तीसरे स्थान पर आए और इस सीट पर यादव और राजपूत मतदाताओं में बंटवारे के साथ ही कुशवाहा ने बाजी मारी और क्षत्रिय समाज से ताल्लुक रखने वाले भाजपा प्रत्याशी को यहाँ से करारी हार का सामना करना पड़ा है।

हालांकि जौनपुर (Jaunpur) के दिग्गज क्षत्रिय छत्रप धनंजय सिंह की रिहाई के बाद भाजपा से करीबी और उनके जौनपुर की दोनों लोकसभा सीटों पर भाजपा को जीत दिलाने वाली बात भी गलत साबित हुई।

और जिले की दूसरी लोकसभा सीट मछलीशहर में भी समाजवादी पार्टी की प्रत्याशी और पूर्व सांसद तूफानी सरोज की बेटी प्रिया सरोज ने भी यहाँ से भाजपा प्रत्याशी और मौजूदा सांसद बीपी सरोज को लगभग 35,000 मतों से पराजित कर यह सीट भी समाजवादी पार्टी के खाते में डाल दी।

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