होमसमाचारमोदी कैबिनेट में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री और उनके मंत्रालय

मोदी कैबिनेट में शामिल पूर्व मुख्यमंत्री और उनके मंत्रालय

Modi Cabinet 3.0: हाल ही में देश में संपन्न हुए लोकसभा चुनाव में राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (एनडीए) को स्पष्ट बहुमत प्राप्त हुआ और भारतीय जनता पार्टी इसमें 240 सीटें हासिल करके सबसे बड़ी पार्टी बनी और लगातार तीसरी बार नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में केंद्र में एनडीए की सरकार बनी।

एनडीए की सरकार में 9 जून को प्रधानमंत्री समेत 72 मंत्रियों ने पद और गोपनीयता की शपथ ली, इसमें 30 नेताओं को कैबिनेट मंत्री बनाया गया है, इन 30 मंत्रियों में से भाजपा के वरिष्ठ नेताओं सहित एनडीए के घटक दलों के कुछ नेताओं को भी स्थान मिला है, किंतु इस बार मोदी के मंत्रिपरिषद (Modi Cabinet) में 6 पूर्व मुख्यमंत्रियों को भी स्थान मिला है।

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इनमें से चार पूर्व मुख्यमंत्री बीजेपी के तो वहीं शेष दो पूर्व मुख्यमंत्री एनडीए के घटक दलों के हैं।

उत्तर प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री राजनाथ सिंह, मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान, हरियाणा के पूर्व मुख्यमंत्री मनोहर लाल खट्टर, असम के पूर्व मुख्यमंत्री सर्वानंद सोनोवाल और सहयोगी दलों में जेडीएस (JDS) से कर्नाटक के पूर्व मुख्यमंत्री एचडी कुमारस्वामी और हिंदुस्तानी आवाम मोर्चा (HAM) के प्रमुख और बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी शामिल भी मोदी कैबिनेट (Modi Cabinet) में शामिल हैं।

मोदी कैबिनेट 3.0 (Modi Cabinet 3.0) में किसको मिला कौन सा विभाग

मोदी कैबिनेट 3.0 (Modi Cabinet 3.0) में शामिल पूर्व मुख्यमंत्रियों को मिली जिम्मेदारी और विभागों की बात करें तो भारतीय जनता पार्टी के पूर्व राष्ट्रीय अध्यक्ष और वरिष्ठ नेता राजनाथ सिंह को रक्षा मंत्रालय की जिम्मेदारी मिली है, इससे पहले मोदी 2.0 में भी राजनाथ सिंह रक्षा मंत्री रह चुके हैं।

मध्य प्रदेश के पूर्व मुख्यमंत्री शिवराज सिंह चौहान को कृषि मंत्री बनाया गया है, तो वहीं मनोहर लाल खट्टर को ऊर्जा एवं शहरी विकास मंत्री बनाया गया है, सर्वानंद सोनोवाल को पोत परिवहन और जल मार्ग मंत्रालय मिला है, तो वहीं एचडी कुमारस्वामी को भारी उद्योग और इस्पात मंत्री बनाया गया है, बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री जीतन राम मांझी को सूक्ष्म, लघु और मध्यम उद्यम (एमएसएमई) मंत्री बनाया गया है।

अब ऐसे में भारतीय जनता पार्टी द्वारा इन पूर्व मुख्यमंत्रियों को बड़ी जिम्मेदारी के साथ कैबिनेट में स्थान देना यह दिखाता है कि कहीं ना कहीं भाजपा आलाकमान इन वरिष्ठ नेताओं के अनुभव का प्रयोग करना चाहता है, तो वहीं कुछ जानकारों का यह भी मानना है कि शिवराज सिंह चौहान और मनोहर लाल खट्टर को मुख्यमंत्री पद से वंचित रखकर केंद्रीय कैबिनेट में शामिल करना भाजपा आलाकमान की मजबूरी भी है।

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