होमसमाचारकैसे बनती है सरकार

कैसे बनती है सरकार

देश के 28 राज्यों और 8 केंद्र शासित प्रदेशों के चुनाव संपन्न हो चुके हैं और परिणाम भी घोषित किए जा चुके हैं। किसकी बनेगी सरकार (Government) इसका तो जवाब मिल गया लेकिन कैसे बनती है सरकार (How Government Formed) क्या यह आपने कभी सोचा है?

सरकार (Government) कैसे बनती है?

चलिए आज जानते हैं देश की चुनावी प्रक्रिया और इसके दांव पेंच – 

कैसे होती है वोटो की गिनती

दरअसल चुनाव खत्म होते ही ईवीएम और वीवीपीएट को सील कर दिया जाता है और उन्हें सुरक्षित केंद्रों पर भेज दिया जाता है इसके बाद प्रत्येक निर्वाचन क्षेत्र में निर्धारित गिनती केंद्र होते हैं, जहां पर वोटो की गिनती की जाती है। यह केंद्र आमतौर पर जिला मुख्यालयों पर होते हैं। गिनती के दिन पहले ईवीएम मशीन को सुरक्षा के बीच खोला जाता है और हर एक मशीन के परिणामों को गिन कर संबंधित उम्मीदवारों के खाते में जोड़ा जाता है।

यह भी पढ़ें – भारतीय टीम से मुलाकात पर नेत्रवलकर ने दिया बड़ा बयान

फिर प्रत्येक विधानसभा क्षेत्र में पांच मतदान केंद्रों में वीवीपीएट स्लिपो का मिलान ईवीएम परिणामों से किया जाता है। यह प्रक्रिया यह पुख्ता करती है कि ईवीएम में गिनती सही है। अब सभी ईवीएम और वीवीपीएट की गिनती होने के बाद परिणाम घोषित किए जाते हैं और विजेता उम्मीदवार के नाम सार्वजनिक किए जाते हैं।

बेशक चुनावी प्रक्रिया पहले की तुलना में आसान हुई है लेकिन कई बार मतदान से पहले देश की राजनीतिक पार्टियों ने ईवीएम की विश्वसनीयता पर सवाल खड़े किए हैं। हालांकि इसे चुनाव आयोग ने सिरे से खारिज किया है। गौरवतलब है कि चुनाव आयोग द्वारा ईवीएम की सुरक्षा के लिए बेहद कड़े इंतजाम किए जाते हैं। चूंकि ईवीएम को खास तौर से डिजाइन किए गए स्ट्रांग रूम में रखा जाता है। यह एक ऐसा कमरा होता है जहां की सुरक्षा अचूक होती है।

कैसे चुनी जाती है सरकार (Government)

रिजल्ट में बहुमत प्राप्त करने वाली पार्टी या गठबंधन सरकार (Government) बनाने का दावा करती है। लोकसभा में कुल 543 सीटें हैं जिनमें 272 सीटों पर जीतने वाली पार्टी या गठबंधन को बहुमत मिलता है। प्रत्येक चुनाव पश्चात राष्ट्रपति बहुमत दल के नेता को प्रधानमंत्री बनाने हेतु आमंत्रित करता है।

आमंत्रण स्वीकार करने के पश्चात संभावित व्यक्ति को लोकसभा में मतदान द्वारा विश्वास मत प्राप्त करना होता है। इसके बाद विश्वास मत प्राप्ति के आदेश को राष्ट्रपति तक पहुंचाया जाता है जिसके बाद एक समारोह में प्रधानमंत्री तथा मंत्रियों को पद की शपथ दिलाई जाती है और उन्हें प्रधानमंत्री नियुक्त किया जाता है जिससे वो सरकार (Government) का गठन कर सकें।

यह भी पढ़ें – आतंकी हमले से दहला देश

यदि कोई एक व्यक्ति लोकसभा में बहुमत प्राप्त करने में अक्षम होता है तो यह पूर्ण रूप से राष्ट्रपति के विवेक पर निर्भर होता है कि वह किस व्यक्ति को प्रधानमंत्री पद प्राप्त करने हेतु आमंत्रित करे। लेकिन अगर किसी भी पार्टी को पूर्ण बहुमत न मिला हो तो उसे पार्टी में विभिन्न दल मिलकर गठबंधन सरकार (Government) बनाने का प्रयास करते हैं। यह प्रक्रिया कठिन हो सकती है क्योंकि विभिन्न दलों के बीच समझौता और सहयोग जरूरी होता है।

कैसे बनते हैं प्रधानमंत्री और मंत्री

हमारे देश में प्रधानमंत्री सबसे महत्वपूर्ण राजनीतिक संस्था है जो देश का प्रतिनिदित्व करता है और सरकार (Government) भी चलता है। प्रधानमंत्री के लिए कोई डायरेक्ट चुनाव नहीं होता है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री को नियुक्त करता है। राष्ट्रपति प्रधानमंत्री और केंद्रीय मंत्रियों को पद और गोपनीयता की शपथ दिलाता है।

पद और गोपनीयता की शपथ लेने के बाद प्रधानमंत्री और सभी केंद्रीय मंत्री एक संवैधानिक पारितंत्र पर दस्तखत करते हैं। वह एक बेहद महत्वपूर्ण दस्तावेज होता है जो राष्ट्रपति या राज्यपाल द्वारा संरक्षित किया जाता है। दरअसल यही देश के लोकतांत्रिक व्यवस्था का संवैधानिक दस्तावेज होता है जो हमेशा सुरक्षित रहता है।

प्रधानमंत्री या मुख्यमंत्री शपथ लेने के बाद कैबिनेट और राज्य मंत्रियों में विभाग का बंटवारा करते हैं। इसके बाद संभावित मंत्री विभाग विधिवत पदभार ग्रहण करते हैं और काम शुरू करते हैं।

विपक्ष का नेता

इस प्रक्रिया में एक विपक्ष का नेता भी चुना जाता है। विपक्ष का नेता बनने के लिए किसी दल को लोकसभा में 10% यानि 545 में से कम से कम 55 सीटें प्राप्त करनी होती हैं। जो मुख्य विपक्षी दल का नेता होता है वह लोकसभा स्पीकर से संपर्क करता है और अपनी पार्टी का नेता घोषित होने की मान्यता प्राप्त करता है।

यह भी पढ़ें – 2024 मे भाजपा से क्यों नाराज हुआ राजपूत वोटर

विपक्ष के नेता को भी शपथ दिलाई जाती है और उन्हें आधिकारिक तौर पर लोकसभा में विपक्ष के नेता का दर्जा प्राप्त होता है। दोनों सदनों में विपक्ष के नेता को 1977 में वैधानिक मान्यता दी गई थी और वह कैबिनेट मंत्री के बराबर वेतन भत्ते और अन्य सुविधाओं के हकदार हैं।

अगर पिछले लोकसभा का अध्यक्ष नवनिर्वाचित लोकसभा के पहली बैठक से ठीक पहले अपना पद खाली कर देता है तो राष्ट्रपति लोकसभा के एक सदस्य को प्रोटेम स्पीकर के रूप में नियुक्त करता है। प्रोटेम एक लैटिन शब्द है जिसका अर्थ होता है कुछ समय के लिए। अर्थ के अनुरूप ही प्रोटेम स्पीकर पद अस्थाई स्पीकर होता है जिसे सीमित अवधि के लिए चुना जाता है।

दिलचस्प बात यह है कि संविधान में प्रोटेम स्पीकर शब्द का स्पष्ट रूप से उपयोग नहीं किया गया है। वहीं इस पद के लिए आमतौर पर सदन की सबसे वरिष्ठ सदस्य का चुनाव किया जाता है।

किसकी बनी थी पहली बार सरकार (Government)

स्वतंत्र भारत का पहला चुनाव 1951-52 में हुआ था। कुछ चुनाव में भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस को भारी बहुमत मिला और जवाहरलाल नेहरू देश के पहले प्रधानमंत्री बने। यह चुनाव भारत के लोकतांत्रिक इतिहास का एक महत्वपूर्ण अध्याय था और समय के साथ चुनाव और सरकार (Government) बनाने की प्रक्रिया में कई बदलाव आए हैं।

कैसे बनती है सरकार – Tweet This?

RELATED ARTICLES

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

- Advertisment -
Sidebar banner

Most Popular

Recent Comments