Wednesday, May 29, 2024
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Loksabha Election 2024 में पक्ष और विपक्ष के “आंखों की किरकिरी” बने कुछ चर्चित निर्दलीय प्रत्याशी

देश इस वक्त 18वीं लोकसभा के चुनाव (Loksabha Election 2024) के दौर से गुजर रहा है विश्व के सबसे बड़े लोकतंत्र में आम चुनाव का यह पर्व अब तक बहुत ही सफल तरीके से मनाया जा रहा है और देश में चुनाव संपन्न होने के बाद 4 जून को नतीजों के साथ 18वीं लोकसभा के गठन के साथ नई सरकार बनेगी!

यह आम चुनाव देश की 543 लोकसभा (Loksabha Election) सीटों पर संपन्न होने हैं इनमें विभिन्न राजनीतिक दलों के उम्मीदवार चुनाव मैदान में हैं और जनता के बीच जाकर खुद को श्रेष्ठ घोषित कर अपने पक्ष में लाने का भर्षक प्रयास कर रहे हैं!
देश में कश्मीर से लेकर कन्याकुमारी तक अनेक राजनीतिक दल है कुछ राष्ट्रीय राजनीतिक दल शेष क्षेत्रीय दल जो अपने-अपने राज्यों में ही सीमित हैं वहाँ से चुनाव लड़ रहे हैं और दिल्ली में अपने क्षेत्र के प्रतिनिधित्व के लिए आतुर हैं!

कुछ ऐसे भी उम्मीदवार हैं जो किसी भी दल से टिकट न मिलने की स्थिति में निर्दलीय ही चुनाव मैदान में हैं वैसे तो देश में बहुत से निर्दलीय उम्मीदवार चुनाव लड़ रहे हैं किंतु आज हम बात करेंगे कुछ ऐसे राजनेताओं की जो अपने-अपने क्षेत्र में प्रभावी होने के साथ ही किसी भी दल से टिकट न मिलने से के बाद भी चुनाव में हैं और वहां पर राष्ट्रीय पार्टी के उम्मीदवारों के साथ उनका जबरदस्त मुकाबला देखने को मिल रहा है!

बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा (Loksabha Election)

अब बात करेंगे राजस्थान की एक ऐसी लोकसभा सीट की जहाँ पर सत्ता पक्ष के साथ-साथ विपक्ष का भी मजबूत उम्मीदवार हैं और उस सीट पर निर्दलीय उम्मीदवार दोनों दलों की मुश्किलें बढ़ाता हुआ नजर आ रहा है, हम बात कर रहे हैं राजस्थान की बाड़मेर-जैसलमेर लोकसभा सीट (Loksabha Election) की जहां पर भारतीय जनता पार्टी ने केंद्रीय मंत्री कैलाश चौधरी को यहां से उम्मीदवार के रूप में उतारा है तो कांग्रेस ने इस सीट से उमेदाराम बेनीवाल को प्रत्याशी बनाया है।

राजस्थान की यह लोकसभा सीट इसलिए हॉट सीट कहीं जा रही है क्योंकि यहां से जोधपुर विश्वविद्यालय के निर्दलीय छात्र संघ अध्यक्ष रहे और वर्तमान में राजस्थान विधानसभा में शिव क्षेत्र के प्रतिनिधि रविंद्र सिंह भाटी भी निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं, जिससे इस लोकसभा सीट पर त्रिकोणीय मुकाबला होने के आसार बताए जा रहे हैं!

बक्सर लोकसभा

तो वहीं दूसरी लोकसभा सीट है बिहार की बक्सर जहां से आईपीएस अधिकारी आनंद मिश्रा नौकरी से इस्तीफा देकर निर्दलीय चुनाव मैदान में है बक्सर सीट पर भाजपा से मिथिलेश तिवारी तो इंडिया गठबंधन से सुधाकर सिंह उम्मीदवार है आईपीएस अधिकारी रहे आनंद मिश्रा की कहानी बहुत अलग किस्म की है क्योंकि उन्होंने सरकारी सेवा में होते हुए नौकरी से इस्तीफा देकर चुनाव लड़ने का फैसला किया और जानकार यह भी बताते हैं कि आईपीएस आनंद मिश्रा भारतीय जनता पार्टी के टिकट पर बक्सर से लोकसभा का चुनाव लड़ना चाहते थे किंतु यह ना हो सका, नतीजा कुछ भी हो लेकिन आनंद मिश्रा की चुनाव में आमद से बक्सर का सियासी पारा हाई हो गया है!

काराकाट लोकसभा

तो वहीं बिहार की ही एक दूसरी लोकसभा सीट (Loksabha Election) काराकाट जहां से भोजपुरी जगत की नामचीन हस्ती और पावर स्टार कहे जाने वाले Pawan Singh निर्दलीय चुनाव मैदान में हैं, काराकाट से एनडीए के उम्मीदवार के रूप में राष्ट्रीय लोक समता पार्टी प्रमुख उपेंद्र कुशवाहा तो वहीं इंडिया गठबंधन से भाकपा (माले) के राजाराम सिंह उम्मीदवार हैं।

अब Pawan Singh की एंट्री से काराकाट का भी सियासी मिजाज परिवर्तित नजर आ रहा है क्योंकि Pawan Singh की भोजपुरी इंडस्ट्री में अपनी एक अलग पहचान है और इस लोकसभा सीट (Loksabha Election) पर उस समुदाय के मतदाता भी 3 लाख से अधिक की संख्या में है जिस समुदाय से स्वयं पवन सिंह आते हैं इसलिए बिहार की काराकाट (Loksabha Election) लोकसभा सीट भी इस वक्त चर्चा में है क्योंकि यहां से पवन सिंह के उतर जाने से उपेंद्र कुशवाहा और इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी के सामने भी चुनौती बड़ी है!

पूर्णिया लोकसभा

अब बात करते हैं बिहार की एक हाई प्रोफाइल सीट पूर्णिया की जहां पर जन अधिकार पार्टी प्रमुख राजेश रंजन “पप्पू यादव” खुद निर्दलीय प्रत्याशी के रूप में चुनाव मैदान में हैं यहां से एनडीए उम्मीदवार के रूप में जद(यू) के संतोष कुमार तो वही इंडिया गठबंधन की तरफ से राजद की बीमा भारती मैदान में है।

Loksabha Election 2024 का आगाज होते ही पप्पू यादव ने अपनी जन अधिकार पार्टी का विलय कांग्रेस में कर दिया था उनको आशा थी कि इस सीट से वह गठबंधन के उम्मीदवार होंगे किंतु परिस्थितियाँ बदली और गठबंधन उम्मीदवार के रूप में राजद की बीमा भारती को मैदान में उतारा गया जिससे पप्पू यादव ने खुद की राहें जुदा करते हुए निर्दलीय चुनाव लड़ने का निर्णय लिया, इस सीट को लेकर देश की सियासत में चर्चा जोरों पर है।

विदित हो कि बिहार की सियासत में पप्पू यादव दीगर नाम नहीं है, पप्पू यादव ने पांच बार विभिन्न दलों और विभिन्न क्षेत्रों से लोकसभा का चुनाव (Loksabha Election) जीतकर संसद की दूरी तय की है।

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