Wednesday, May 29, 2024
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अजेय प्रधानमंत्री का आज वाराणसी से नामांकन

साल 1950 में वडनगर गुजरात के एक साधारण परिवार में जन्म लेने वाले प्रधानमंत्री (Prime Minister) नरेंद्र मोदी आज बनारस से नामांकन करने जा रहे है। बचपन से ही संघ की विचारधारा से प्रेरित नरेंद्र मोदी की जीवनी पर विशेष

1967 में 17 साल की उम्र में मोदी ने अहमदाबाद में राष्ट्रीय स्वं सेवक संघ की सदस्य्ता ली, इसके बाद 1974 में नव निर्माण आंदोलन में भी शामिल हुए तो यहाँ कहा जा सकता है की मोदी ने सक्रिय राजनीति से पहले वह राष्ट्रीय प्रचारक के रूप में दशकों तक काम किया। 1980 में नरेंद्र मोदी भाजपा की सदस्य्ता लेने के बाद लगातार सक्रिय रहे जिसका इनाम उनको भाजपा ने गुजरात के प्रदेश महासचिव बनाकर दिया।


नरेंद्र मोदी के जीवन में क्रन्तिकारी परिवर्तन तब आया जब वो उस वक़्त के भाजपा के कद्दावर नेता लाल कृष्ण आडवाणी के 1990 में सोमनाथ से अयोध्या रथ यात्रा का हिस्सा बने । लालकृष्ण आडवाणी को मोदी की शैली पसंद आयी और 1995 में मोदी भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय सचिव बने और साथ ही 5 राज्यों के प्रभारी भी बनाये गए ।

साल 2001 में एक नाटकीय घटनाक्रम के तहत केशुभाई पटेल की जगह पर मोदी को गुजरात का मुख्यमंत्री बनाया गया बता दे की मोदी उस वक़्त गुजरात विधान मंडल के सदस्य नहीं थे । मोदी के मुख्यमंत्री बनते ही गुजरात संकट / आपदा के घेरे में आ गया भूकंप के साथ साथ गोधरा रेल हादसा हुआ जिसमे कार सेवको को कुछ उपद्रियों ने जला दिया, इसके बाद 2002 में गुजरात में दंगे भड़क उठे जिसमे लगभग 2000 से ज्यादा मुसलमानो को मौत के घाट उतार दिया गया था।

सिर्फ देश ही नहीं पूरे विश्व में भारत को एक बड़ी आलोचना का सामना करना पड़ा। मोदी के दंगा रोकने में असफल होने का गंभीर इलज़ाम लगा इतना ही नहीं अटल बिहारी बाजपेयी ने मोदी को राजधर्म निभाने की नसीहत तक दे डाली ।
बात यहाँ तक बिगड़ गयी की मोदी को उनके पद से हटा दिया जायेगा ऐसा प्रतीत हो रहा था, उस वक़्त के तत्कालीन उप (Prime Minister) लाल कृष्ण आडवाणी ने मोदी को बचाया और शायद उस वक़्त आडवाणी न होते तो मोदी आज प्रधानमंत्री (Prime Minister) भी ना होते ।

स्थिति कितनी भयावह थी इसका अंदाजा इस बात से लगाया जा सकता है की अमेरिका ने मोदी के वीजा पर बैन तक लगा दिया था। इन सभी दुस्वारियों से इतर 2002 में गुजरात चुनाव में मोदी को प्रचंड बहुत मिला और दिन गुजरते गए और दंगो के दाग धुलते चले गए साल 2007 आते आते मोदी गुजरात में अजेय हो चुके थे, 2012 में भी जीतकर मोदी ने अपने नेतृत्व क्षमता का लोहा मनवा दिया था।


अब मोदी के दिमाग में राष्ट्रीय नेतृत्व करने का फितूर सवार हो चुका था, तमाम तरह के गेटअप को अपनाने का हुनर मोदी में बचपन से था जिसका लाभ उनको देश की विविधताओं को साधने में मिला । नरेंद्र मोदी का मैनेजमेंट और उनके कार्य करने की शैली से प्रभावित होकर संघ ने उनको बड़ी जिम्मेदारी देने की सोची और उसको मोदी ने बखूबी निभाया, मोदी की एक ताक़त उनका तकनिकी ज्ञान भी था

जिसका उन्हें लाभ मिला, वर्ष 2008 में मोदी ने टाटा को गुजरात में नैनो का प्लांट लगाने को आमंत्रित करके मास्टर स्ट्रोक चला जिसकी वजह से वह पुरे देश में चर्चित हो गए साल दर साल मोदी का कद बढ़ता चला गया और साल 2013 का वो दिन भी आया जब सुषमा स्वराज जैसे दिग्गज नेताओं को दरकिनार करते हुए मोदी भाजपा के तरफ से प्रधानमंत्री (Prime Minister) पद के उम्मीदवार बने जिसकी आधिकारिक पुष्टि तत्कालीन भाजपा अध्यक्ष राजनाथ सिंह ने की,


भाजपा के साथ साथ देश ने भी अपना प्रधानमत्री (Prime Minister) चुन लिया था और 2014 के नतीजों ने सबकुछ बदल कर रख दिया और 2019 ने तो जैसे विपक्ष को हासिये पर ला दिया । मोदी के बारे में एक बात और दिलचस्प है और वो है की आज तक मोदी ने जितने चुनाव लड़े है सबमे जीत हाशिल की है आज बनारस से अपना नामांकन करने जा रहे मोदी अपने जीत को लेकर आत्मविश्वास से लबरेज है

 

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