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क्या बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत की इस हरकत का पड़ सकता है बुरा असर

ऊंट से संसद जाना चाह रहे थे राजकुमार रोत (Rajkumar Roat)

ऊंट पर बैठकर बांसवाड़ा-डूंगरपुर सांसद राजकुमार रोत (Rajkumar Roat) संसद भवन पहुंचने की कोशिश कर रहे थे जिसमे वह सफल नहीं हो पाए लेकिन उनकी इस कोशिश ने एक नए विवाद को जन्म दे दिया, अब यहां सवाल यह उठता है कि क्या किसी जनप्रतिनिधि का इस तरह का व्यवहार, जानवरों के प्रति क्रूरता को बढ़ावा नहीं दे रहा है।

सांसद राजकुमार रोत

पशु क्रूरता अधिनियम के 1960 के तहत अनावश्यक क्रूरता एवं जानवरों से उत्पीड़न के मामले में सजा का प्रावधान है, वैसे यह विषय बहुत बड़ा है जिस पर हम विस्तार से आपको कभी बताएंगे, फिलहाल हम यह बताना चाहते हैं की राजस्थान के बांसवाड़ा डूंगरपुर के संसद की इस हरकत को गंभीरता से लेना चाहिए।

पुलिस के रोकने पर राजकुमार रोत (Rajkumar Roat) ने क्या कहा?

जब पुलिस वालों ने राजकुमार रोत (Rajkumar Roat) को रोका तो उन्होंने कहा की मैं राजस्थान पर्यटन को बढ़ावा देने के लिए ऐसा कर रहा हूं लेकिन यह बात बिल्कुल तर्कसंगत नहीं है, राजकुमार रोत (Rajkumar Roat) एक लोकसभा के प्रतिनिधि है और आपको इस बात का ख्याल रखना होगा कि आपके द्वारा किए गए इस हरकत से प्रेरित होकर बहुत सारे लोग इस तरह की हरकत करना शुरू कर देंगे।

आज हम जिस दौर से गुजर रहे हैं वह प्रकृति संतुलन के लिए ठीक नहीं है, हमे अपने साथ साथ जल जंगल जमीन का भी ख्याल रखना होगा, इसमें एक बड़ी तादाद उन जानवरों की भी है जो कही न कही हमसे जुड़े हुए है ।


जबकि पीपल फॉर द एथिकल ट्रीटमेंट ऑफ एनिमल्स (PETA) जैसे कुछ संगठनों का मानना ​​है कि ऊँट की सवारी पर पूरी तरह से प्रतिबंध लगा दिया जाना चाहिए, हमारा मानना ​​है कि जब तक जानवरों के साथ अच्छा व्यवहार किया जाता है, यह गतिविधि उन क्षेत्रों में बहुत ज़रूरी आय प्रदान कर सकती है जो पर्यटन पर निर्भर हैं।

दुख की बात है कि कई मालिकों के पास अपने ऊँटों के लिए जो पारंपरिक सम्मान और देखभाल है, वह सार्वभौमिक नहीं है। कई मध्य पूर्वी देशों में पर्यटकों के लिए ऊँट की सवारी आम है, और कुछ जानवरों को ज़्यादा काम करना पड़ता है क्योंकि उनके मालिक ज़्यादा से ज़्यादा आय कमाने की कोशिश करते हैं।

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समस्या यह है कि ऊँट की सवारी के इन अनुभवों की पेशकश करने वाले कई देशों में या तो सख्त पशु कल्याण कानून नहीं हैं या उन्हें ठीक से लागू नहीं किया जाता है, जिससे दुर्व्यवहार होता है। सवाल ये उठता है की क्या सिर्फ राजस्थानी होने के दिखावे के लिए सांसद राजकुमार रोत (Rajkumar Roat) का इस तरह से ऊंट को उपयोग में लाना सही था।

हम सबको यह ध्यान रखना होगा की आखिरकार जानवर के कल्याण का सबसे अच्छे न्यायाधीश हम खुद ही है, क्योंकि आप ही सवारी के लिए लाइन में खड़े हो जाते हैं।

कई मामलों में, ऊँट के साथ दुर्व्यवहार किया जा रहा है या नहीं यह स्पष्ट तौर पर बताना मुश्किल है लेकिन आपको इतना जरूर समझना होगा की ऊंट बोल नहीं सकता है लेकिन उसके आंसू सबकुछ ब्यां कर देता है। इसलिए हम सभी को आवाज उठाना होगा ये सरासर गलत है, सरकार को इसके लिए सोचना होगा और कठोर नियम बनाने होंगे।

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