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गैर-कांग्रेसी मिश्रित सरकारों की समीक्षा

भारतीय राजनीति में केंद्र में 1977 के बाद अब तक बनने वाली मिश्रित सरकारों में एक के अतिरिक्त कोई भी सरकार अपनी कार्यावधि पूरी नहीं कर सकी, निर्धारित अवधि न पूरी करने वाली सरकारों में अधिकतम अवधि मोरारजी देसाई सरकार की थी जो 2 वर्ष से अधिक जीवित रही, सबसे कम अवधि की सरकार 1996 में बनने वाली अटल बिहारी वाजपेयी की सरकार थी जो केवल 13 दिनों के बाद भंग हो गई !

केंद्र में बनने वाली मिश्रित सरकारों का आधार उनका स्वरूप, कार्यशैली और निष्पादन राज्यों में गठित मिश्रित सरकारों से कुछ भिन्न नहीं था सत्ता प्राप्त करने की होड़, राजनीतिक स्वार्थपरता, साम्यिक लाभ, सिद्धांत विहीन गठबंधन और व्यक्तिगत हितों की प्राथमिकता, केंद्र की मिली-जुली सरकारों की सामान्य विशेषताएं थी !मिश्रित सरकारों का निर्माण जिन राजनीतिक दलों के गठबंधन से हुआ उनमें परस्पर विरोधी विचारधाराओं वाले राजनीतिक दल भी सम्मिलित थे ! उदाहरण के लिए वीपी सिंह मंत्रिमंडल को तत्कालीन भारतीय जनता पार्टी और साम्यवादी दल दोनों ही का समर्थन प्राप्त था धर्मनिरपेक्ष राजनीतिक दल होने का दावा करने वाले जनता दल की सरकार भाजपा के समर्थन पर अस्तित्व में आई, विभिन्न राजनीतिक दलों ने एक दूसरे को सिद्धांत या कार्यक्रम के आधार पर समर्थन नहीं दिया, बल्कि व्यक्ति के नाम पर समर्थन या विरोध किया !उदाहरण के लिए कांग्रेस ने चरण सिंह को पहले समर्थन दिया और कुछ दिनों बाद समर्थन वापस लेकर सरकार का विघटन करा दिया, इसी प्रकार वीपी सिंह को हटाने के लिए कांग्रेस ने चंद्रशेखर का साथ दिया और 61 सदस्यों के दल को सत्तारूढ़ कर दिया, एचडी देवगौड़ा के नेतृत्व में बनी यूनाइटेड फ्रंट सरकार को हटाने के लिए कांग्रेस ने यह कहा कि वह यूनाइटेड फ्रंट सरकार को इस शर्त पर समर्थन देगी कि वह अपना नेता बदल ले ! जनता दल ने सत्ता में बने रहने के लिए इस मांग को मान लिया और देवगौड़ा को हटाकर गुजराल को अपना नेता चुन लिया कांग्रेस द्वारा दल का नेता बदलने की शर्त रखने से कहीं ज्यादा आश्चर्यजनक बात जनता दल द्वारा इस मांग को स्वीकार करना था !यह घटना इस बात को सिद्ध करती है कि केवल सत्ता में बने रहने के लिए लालसा ही संपूर्ण राजनीति का केंद्र बिंदु रही !

1996 में भारतीय जनता पार्टी ने जिन परिस्थितियों में सरकार बनाने का निर्णय लिया और जिस प्रकार 12 -13 दलों की सरकार को पराजित होना पड़ा उसने दल की छवि को काफी धूमिल कर दिया और यह सिद्ध कर दिया कि अन्य दलों की तरह भाजपा भी सत्ता में आने के लिए बेचैन है भले ही इसके लिए सिद्धांतों, मूल्यों और मान्यताओं का बलिदान ही क्यों न करना पड़े !

केंद्र में गठित की गई मिश्रित सरकारों में क्षेत्रीय दलों का बाहुल्य रहा और सरकार बनवाने और गिराने में उन्होंने सक्रिय भूमिका अदा की ! परिणामस्वरुप 1989 के बाद से केंद्र सरकार पर क्षेत्रीय दलों का प्रभाव निरंतर बढ़ता रहा, साधारण स्थानीय और क्षेत्रीय मुद्दों यहां तक की व्यक्तिगत मामलों को लेकर छोटे-छोटे घटक दलों के नेता सरकार से अलग होने की धमकी देकर अपनी बात मनवाने का प्रयास करते रहे हैं, इस प्रकार क्षेत्रीय राजनीतिक दलों तथा राज्यों में सत्तारूढ़ राजनीतिक दलों पर केंद्र सरकार की निर्भरता दिन प्रतिदिन बढ़ती गई !

भारतीय राजनीतिक इतिहास में 1977 से 2004 तक जितनी भी साझा सरकारें बनी, वे सब गैर-कांग्रेसी सरकारें थी, 1989 के लोकसभा चुनाव में कांग्रेस को सबसे अधिक सीटें प्राप्त हुई थी ! किंतु उसने सरकार बनाने से इनकार कर दिया 1996,99 के बीच भी कांग्रेस के नेतृत्व में मिश्रित सरकार बनाने की चर्चा तो अवश्य रही लेकिन कांग्रेस दल में साझा सरकार बनाने के प्रश्न पर मतैक्य ना हो सका !

आरंभ में कांग्रेस पार्टी की दिलचस्पी मिश्रित सरकार बनाने में भले ही ना रही हो लेकिन मिश्रित सरकारों को गिराने में कांग्रेस ने निःसंदेह सक्रिय भूमिका अदा की, उसने विरोधी राजनीतिक दलों की सरकारों को अनावृत करने के लिए समर्थन दिया और फिर कोई बहाना बनाकर समर्थन वापस ले लिया उसने अप्रत्यक्ष रूप से दलों के आंतरिक विभाजन को प्रोत्साहन दिया ! चौधरी चरण सिंह की सरकार बनवाने और कुछ ही दिनों बाद उससे समर्थन वापस ले लेने, वीपी सिंह के खिलाफ चंद्रशेखर के 61 सदस्यीय दल की सरकार बनवाने तथा एचडी देवगौड़ा की सरकार को भंग कराने में कांग्रेस की भूमिका सिद्धांतपरक नहीं कहीं जा सकती, वह राजनीतिक द्वेष से ग्रस्त थी !

“बाहर से समर्थन” देने की पद्धति मिली-जुली सरकारों के अस्थायित्व के लिए मूल रूप से जिम्मेदार रही ।मंत्रिमंडल में औपचारिक रूप से सम्मिलित न होने के कारण इन दलों ने तमाशाई की भूमिका अदा की, उन्होंने सरकार बनाने और गिराने के मामले को गंभीरता से नहीं लिया और छोटी-छोटी बातों को लेकर तरह-तरह के बहाने बनाकर सरकारें बनवाई और भंग कराई, उन्होंने स्थिति का अनुचित लाभ उठाया ।

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