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आंध्र प्रदेश की पारंपरिक पोशाक: रंगों और संस्कृति का संगम

आंध्र प्रदेश, भारत के दक्षिण में स्थित एक समृद्ध राज्य है, जहाँ की संस्कृति उतनी ही जीवंत है जितनी यहाँ के रंगीन वस्त्र। यहाँ की पारंपरिक पोशाकें, सदियों पुरानी विरासत और स्थानीय कला का अद्भुत मिश्रण हैं, जो पहनने वाले को एक अनोखी पहचान देती हैं।

पुरुषों के लिए:

धोती और कुर्ता: पुरुषों के लिए पारंपरिक पोशाक धोती और कुर्ता है। धोती, सफेद रंग की लम्बी कपड़े की एक शीट होती है जिसे कमर के चारों ओर लपेटा जाता है। कुर्ता, घुटने तक लंबा ढीला कुर्ता होता है जिसे धोती के ऊपर पहना जाता है।
लुंगी और शर्ट: लुंगी, धोती का ही एक रूप है, जिसे ढीला-ढाला पहना जाता है। इसे अक्सर शर्ट के साथ पहना जाता है।

महिलाओं के लिए:

लंगा-ओनी: महिलाओं के लिए पारंपरिक पोशाक लंगा-ओनी है। लंगा घुटने तक लंबी स्कर्ट होती है जिसे रेशम या सूती कपड़े से बनाया जाता है। ओनी दुपट्टा होता है जिसे कंधों पर या सिर पर रखा जाता है।
पावु: पावु एक साड़ी की तरह की पोशाक है, जिसे रेशम या सूती कपड़े से बनाया जाता है। इसे कमर के चारों ओर लपेटा जाता है और एक दुपट्टा भी पहना जाता है।

और जब हम आभूषण के बारे में बात करते हैं तो
आंध्र प्रदेश के लोग, सोने, चांदी और हीरे से बने भारी आभूषण पहनने के लिए जाने जाते हैं। महिलाएं, हार, झुमके, नाक की कील और पैरों के आभूषण पहनती हैं। पुरुष कड़े और अंगूठियां पहनते हैं।

आंध्र प्रदेश की पारंपरिक पोशाकें चमकीले रंगों और जटिल डिजाइनों के लिए प्रसिद्ध हैं। रेशम, सूती और कांजीवरम कपड़े इन पोशाकों को बनाने के लिए सबसे अधिक उपयोग किए जाते हैं।

आंध्र प्रदेश की पारंपरिक पोशाकें, राज्य की समृद्ध संस्कृति और विरासत का एक महत्वपूर्ण हिस्सा हैं। ये पोशाकें, न केवल सुंदर हैं, बल्कि पहनने वालों को एक अनोखी पहचान भी देती हैं।

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