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लखनऊ को मिलेगी 900 बसों की सौगात

लखनऊ से चलेंगी 900 UPSRTC सरकारी बसों की रियल टाइम मॉनिटरिंग

तेज रफ्तार और दुर्घटनाओं पर रोक लगाने के लिए यूपी रोडवेज बनाएगा कमांड रूम

UPSRTC: जिस तरह आज कल घटनाएं देखने को मिल रही हैं और कई ऐसे लोग है जो रूल भी फॉलो नही करते हैं। इसीलिए बसों की रियल टाइम मॉनिटरिंग के लिए यूपी रोडवेज एक कंट्रोल रूम बनाएगा। अवध बस स्टेशन के पास इसके निर्माण की तैयारी की जा रही है। यह राज्य का पहला क्षेत्रीय कमांड एवं कंट्रोल रूम होगा। इसके अलावा राज्य के 75 जिलों में बसों की निगरानी के लिए 19 अन्य केंद्र खोले जाएंगे।

UPSRTC

लखनऊ रोडवेज (UPSRTC) के आरएम आरके त्रिपाठी ने अवध बस स्टैंड (कमता) पर सेंटर खोलने का प्रस्ताव शासन को सौंपा है। मंजूरी मिलते ही करीब एक साल में लखनऊ में कमांड एंड कंट्रोल सेंटर लखनऊ में अवध बस स्टैंड सेंटर खुलने से बसों की रियल टाइम मॉनिटरिंग हो सकेगी।

हर कोई रूल भी फॉलो करेगा। इससे लखनऊ जिले की ओर जाने वाली करीब 900 UPSRTC बसों पर कड़ी नजर रहेगी। यह केंद्र तेज गति, बस खराब होने, दुर्घटनाओं या किसी आपातकालीन स्थिति से निपटने के लिए समर्पित होगा। यहां से क्षेत्रीय प्रबंधक और सहायक क्षेत्रीय प्रबंधक मैनेजर बस ड्राइवर और कंडक्टर से भी बात कर सकते हैं।

लखनऊ रोडवेज (UPSRTC) के आरएम आरके त्रिपाठी

यहां से यात्रियों को मिलने वाली सुविधाओं पर भी नजर रखी जाएगी। मुख्यालय ने राज्य भर के 20 क्षेत्रों में लगभग 11,000 UPSRTC बसों की निगरानी के लिए एक कमांड और कंट्रोल सेंटर स्थापित किया है। यहां से बसों की निगरानी की जाती है, लेकिन अभी पूरी तरह से अपडेट नहीं किया गया है।

यूपीएसआरटीसी के प्रवक्ता अजीत सिंह ने कहा कि नोएडा, लखनऊ, प्रयागराज, आगरा, मेरठ और अयोध्या सहित निगम के 20 जिलों में परियोजना शुरू करने का प्रस्ताव है। इससे सड़क सुरक्षा सुनिश्चित होगी और यात्रियों को बेहतर सुविधाएं मिलेंगी।

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अवध बस स्टेशन कमांड सेंटर के रूप में चुना गया था। अवध बस स्टेशन पर कुल 13 प्लेटफार्म हैं। यहां दिन भर में 450 बसें संचालित होती हैं। इससे करीब 4,000 यात्री गुजरते हैं। बस 8 रूटों पर चलती है: गोंडा-बलरामपुर, बहराईच नानापारा रपडीहा, अयोध्या-देवरिया, अयोध्या-बलिया, आज़मगढ़-बलिया (पूर्वाचल एक्सप्रेसवे के माध्यम से), उन्नाव-झांसी और दिल्ली।

इस बीच यहां के प्रशिक्षण केंद्र में दुर्घटना से बचाव, बीएस-6 बसों के लिए जरूरी सिफारिशें, डीजल औसत में सुधार और यात्रियों से बेहतर व्यवहार कैसे किया जाए, यह भी सिखाया जाता है।

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