होमसमाचारकौन हैं अयोध्या में भाजपा को मात देने वाले अवधेश प्रसाद?

कौन हैं अयोध्या में भाजपा को मात देने वाले अवधेश प्रसाद?

Awadhesh Prasad: उत्तर प्रदेश के पूर्वांचल के प्रवेश द्वार से महज़ कुछ किलोमीटर की दूरी पर स्थित प्रसिद्ध रामनगरी अयोध्या जो कि अपने आप में प्राचीन काल से ही एक दिव्य और भव्य आध्यात्मिक केंद्र माना जाता है, यहां की राजनीति भी दिलचस्प है जहां एक तरफ भारतीय जनता पार्टी इस सीट पर अपनी जीत को लेकर आस्वस्त रहती है, तो वहीं समय-समय पर अन्य दलों को भी अयोध्यावासियों ने मौका देकर आजमाया है।

जहां एक तरफ मोदी लहर में साल 2014 और 2019 में अयोध्या लोकसभा में कमल खिला तो इस बार इस सीट पर समाजवादियों की साइकिल दौड़ती हुई नजर आई, इस साइकिल की स्टेयरिंग फैजाबाद लोकसभा सीट पर समाजवादी पार्टी के वयोवृद्ध नेता और मिल्कीपुर विधायक अवधेश प्रसाद (Awadhesh Prasad) के हाथ में थी।

जिन्होंने इस सीट पर दो बार के भाजपा सांसद लल्लू सिंह को न सिर्फ हैट्रिक लगाने से रोका, बल्कि लगभग 54000 मतों के अंतर से अपनी जीत भी सुनिश्चित की।

आज हम अपने इस विशेष अंक में बात करेंगे लम्बे समय तक मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे खॉटी समाजवादी नेता

अवधेश प्रसाद (Awadhesh Prasad) के बारे में –

समाजवादी पार्टी के नेता 79 साल के अवधेश प्रसाद मज़बूत क़दमों से चलते हैं, उन्हें देखकर उम्र का अंदाज़ा लगाना मुश्किल है उनके सहचरों में अधिकतर कार्यकर्ता युवा हैं।

नौ बार विधायक और छह बार राज्य सरकार में मंत्री रहे अवधेश प्रसाद (Awadhesh Prasad)  राजनीति में अचानक नहीं आए थे, ये उनका सोचा समझा क़दम था, अपने बचपन का एक क़िस्सा सुनाते हुए अवधेश प्रसाद कहते हैं, दसवीं पास करने के बाद हम एक सांसद के पास अपनी फ़ीस माफ़ करवाने के लिए हस्ताक्षर करवाने गए थे।

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उन सांसद जी का व्यवहार अपमानजनक था अवधेश प्रसाद कहते हैं, “मैं युवा था, मैंने खुद को बहुत अपमानित महसूस किया, मैं वहीं बैठा और एक काग़ज़ पर लिखाअवधेश प्रसाद- एलएलबी, एडवोकेट, विधायक, सांसद- गृह मंत्री

मैंने उस दिन अपने लिए तय किए सभी लक्ष्य हासिल कर लिए हैं बस एक रह गया है” मजबूत इरादों वाला यह सख्श अपने द्वारा खुद के बारे में लिखे गए पदों में से सब कुछ हासिल कर चुका है सिर्फ एक पद अब शेष रह गया है।

31 जुलाई, साल 1945 को सुरवारी गांव के एक साधारण किसान परिवार में पैदा हुए इस समाजवादी नेता अवधेश प्रसाद (Awadhesh Prasad) ने लखनऊ यूनिवर्सिटी से एलएलबी किया और कानपुर के डीएवी कॉलेज से उन्होंने एमए किया है। अवधेश प्रसाद ने बीए, एमए करने के बाद 1968 में क़ानून की डिग्री पूरी की।

अवधेश प्रसाद बताते हैं कि, “एलएलबी का आख़िरी पेपर देने के बाद मैं सीधे फ़ैज़ाबाद कचहरी पहुंचा था वहां सरकार बनाम साहब का एक केस मेरे पास आया मैंने मुवक्किल से कहा कि अभी मुझे डिग्री नहीं मिली है, लेकिन उसने ज़िद की की मैं उनकी तरफ़ से मुक़दमा दायर करूं।”

वे आगे बताते हैं कि “उस मुवक्किल ने मुझे 12 रूपये फ़ीस दी थी अभी मुझे डिग्री नहीं मिली थी, मैं एक बड़े वकील के पास गया और वो 12 रुपये देकर मुक़दमा फ़ाइल करने के लिए कहा उन्होंने दो रुपये अपने मुंशी को दिए और दस रुपये मेरे मना करने के बावजूद मुझे लौटा दिए ये क़ानून की पढ़ाई से मेरी पहली कमाई थी”।

अवधेश प्रसाद (Awadhesh Prasad) राजनीति में आना उनका लक्ष्य था और पढ़ाई के दौरान ही वह राजनीति में सक्रिय हो गए थे। 1968 में उन्होंने वकालत शुरू कर दी थी और इस दौरान वो राजनीतिक रूप से भी सक्रिय थे।

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उन्होंने पहला चुनाव 1974 में लड़ा और 324 वोट से हार गए, अगले कुछ सालों में देश में आपातकाल लग गया था।
लोकनायक जय प्रकाश नारायण ने आपातकाल के विरोध में आंदोलन शुरू किया अवधेश प्रसाद (Awadhesh Prasad) भी इसमें शामिल हुए और बढ़-चढ़कर हिस्सा लिया।

आपातकाल के समय देश के बड़े विपक्षी नेताओं को गिरफ़्तार किया गया था अवधेश प्रसाद (Awadhesh Prasad) भी इस दौरान लखनऊ और फ़ैज़ाबाद की जेल में रहे थे। जब अवधेश प्रसाद आपातकाल के समय जेल में थे। इसी दौरान उनकी मां का निधन हो गया।

मां को याद कर अवधेश प्रसाद (Awadhesh Prasad) आज भी भावुक हो जाते हैं अवधेश प्रसाद कहते हैं, “चार दिन तक मेरी मां की लाश पड़ी रही लेकिन मैं अंतिम दर्शन के लिए नहीं जा सका, मैं अपने पिता के भी अंतिम दर्शन नहीं कर सका था उस वक्त अमेठी में संजय गांधी बनाम शरद यादव चुनाव हो रहा था।

चौधरी चरण सिंह ने हमें अमेठी की जिम्मेदारी सौंपी थी और कहा था कि – तुम अपने गांव ना जाना, इस दौरान मेरे पिता का देहांत हो गया और मैं काउंटिंग एजेंट था उस समय बैलेट पेपर से मतदान होता था जिसकी वजह से छह-सात दिनों तक गिनती होती थी काउंटिंग से एक दिन पहले मेरे पिता का निधन हो गया था लेकिन मैं अन्तिम दर्शन के लिए भी नहीं जा सका था।

इतना ही नहीं अवधेश प्रसाद (Awadhesh Prasad) ने अपने राजनीतिक जीवन में भी वकालत साधकर निरंतर जारी रखा। अयोध्या से हैरान करने वाली जीत के बाद अवधेश प्रसाद का राजनीतिक क़द बढ़ गया है अवधेश प्रसाद नपे तुले अंदाज़ में ये भी दावा करते हैं कि उनके सामने कोई भी होता वो हार जाता।

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वो दावा करते हैं कि अखिलेश यादव ने पहले ही उन्हें अयोध्या से चुनाव लड़ाने का मन बना लिया था,अवधेश प्रसाद कहते हैं, “अखिलेश यादव ने अक्टूबर में हमसे में कहा था कि विधायक जी आपको बड़ा आदमी बनाएंगे, आप देखिएगा बीबीसी लंदन भी आपके पास इंटरव्यू लेने आएगा, लेकिन उन्होंने ये नहीं कहा था कि हमें अयोध्या से टिकट देंगे”।

अवधेश प्रसाद (Awadhesh Prasad) कहते हैं, “ये हमारी नहीं, अयोध्या की महान जनता की जीत है, अगर प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी भी यहां से चुनाव में होते तो हार जाते, क्योंकि जनता ने ठान लिया था कि अहंकार की राजनीति को हराना है” फ़ैज़ाबाद में बीजेपी के प्रत्याशी लल्लू सिंह को चार लाख 99 हज़ार से ज़्यादा मत मिले हैं और अयोध्या विधानसभा सीट से वह चार हज़ार की बढ़त भी हासिल करने में कामयाब रहे।

लेकिन शेष अन्य विधानसभाओं में वे पीछे रहे जिससे वे यह चुनाव 54 हज़ार मतों से हार गए हैं और इस सीट पर अवधेश प्रसाद (Awadhesh Prasad) को जीत मिली है जिससे समाजवादियों में खुशी की लहर है।

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