होममनोरंजनपरंपरा एवं संस्कृतिकौन है वो चिरंजीवी जिसे अमर होने का श्राप मिला था ?

कौन है वो चिरंजीवी जिसे अमर होने का श्राप मिला था ?

अश्वत्थामा द्वापर युग से जुड़ा एक ऐसा नाम है, जिसे चाह कर भी कोई कभी भुला नहीं सकता। हम बात कर रहे हैं महाभारत से जुड़े एक ऐसे महान योद्धा के बारे में जिसे आजीवन भर अमर रहने का श्राप मिला था।

कौन है अश्वत्थामा ?

अश्वत्थामा महाभारत के एक महान योद्धा थे। वे द्रोणाचार्य के पुत्र और दुर्योधन के बहुत अच्छे मित्र थे। उन्होंने महाभारत में कौरवों की तरफ से युद्ध लड़ा था।

क्यों मिला था अश्वत्थामा को श्राप?

अश्वत्थामा के मस्तक पर अमृत मणी होने के कारण उन्हें कोई नहीं मार सकता था। महाभारत के युद्ध में पिता द्रोणाचार्य और मित्र दुर्योधन की मृत्यु से अश्वत्थामा पांडवों से काफी क्रोधित हो गए थे। उन्होंने पांडवों से बदला लेने के लिए, रात के अंधेरे में उन पर प्रहार कर दिया। वह अनजाने में पांडवों की जगह द्रौपदी के पुत्रों की हत्या कर आए थे। जब वेदव्यास जी ने उनसे इस बारे में बताया तब अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र का प्रयोग कर पांडवों को मारना चाहा। वहीं दूसरी तरफ श्री कृष्ण के कहने पर अर्जुन ने भी ब्रह्मास्त्र छोड़ दिया था, परंतु वेदव्यास जी के कहने पर उन्होंने उसे वापस ले लिया। लेकिन अश्वत्थामा ने ब्रह्मास्त्र को पांडवों के वंश का नाश करने के लिए अभिमन्यु और उत्तरा पुत्र परीक्षित पर चला दिया, जो कि उस समय उत्तरा के गर्भ में था और उसकी गर्भ में ही मौत हो गई। तभी भगवान श्री कृष्ण ने क्रोध में आकर अश्वत्थामा की मणी को छीन लिया और उन्हें सदैव जीवित रहने का श्राप दे दिया वहीं अभिमन्यु-उत्तरा पुत्र परीक्षित को पुनः जीवन दान दिया।

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