Wednesday, April 17, 2024
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गोण्डा लोकसभा सीट पर इस बार कौन मारेगा बाजी?

गोण्डा लोकसभा क्षेत्र अयोध्या से सटा हुआ है. राजधानी लखनऊ से लगभग 100 किमी० की दूरी पर स्थित है !
कहा जाता है कि गोण्डा को राजा देवी बख्श सिंह ने बसाया था. गोण्डा लोकसभा क्षेत्र पर मनकापुर राजघराने का कब्जा है. आजादी के बाद अब तक हुए चुनाव में 8 बार कांग्रेस और 5 बार बीजेपी ने अपना परचम लहराया है. 5 विधानसभा क्षेत्रों में गोण्डा सदर, मनकापुर ,गौरा, मेहनौन और उतरौला शामिल हैं. 2019 लोकसभा चुनाव के मुताबिक, गोण्डा लोकसभा में 17,84,768 मतदाता हैं.

कब किस दल को मिली विजयश्री

गोण्डा का चुनावी इतिहास
साल 1952 में हिंदू महासभा की शकुंतला नायर गोंडा से सांसद निर्वाचित हुई थीं.
साल 1957 में दिनेश प्रताप सिंह ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज की थी. साल 1962 में राम रतन गुप्ता कांग्रेस से तो जीते थे, लेकिन रिपीटेशन के बाद पंडित नारायण डांडेकर स्वतंत्र पार्टी से लगभग ढाई साल सांसद रहे. साल 1967 में सुचेता कृपलानी ने कांग्रेस के टिकट पर जीत दर्ज कर सांसद बनी थीं. साल 1971 में मनकापुर राजघराने के कुंवर आनंद सिंह कांग्रेस से जीते थे. साल 1977 में सत्यदेव सिंह ने जनता पार्टी से जीत दर्ज की थी. साल 1980, 1984, 1989 में लगातार कांग्रेस के आनंद सिंह ने अपना परचम लहराया था.
मंदिर आंदोलन के बाद से भारतीय जनता पार्टी ने जिले में अपनी पैठ बनाई. साल 1991 में भाजपा के बृजभूषण शरण सिंह ने निर्वाचित हो कर कमल खिलाया था.
साल 1996 में बृजभूषण शरण सिंह की पत्नी श्रीमती केतकी सिंह ने भाजपा से चुनाव लड़ा और जीत का झंडा गाड़ा था.
साल 1999 में मनकापुर राजघराने के कुंवर आनंद सिंह के बेटे कीर्तिवर्धन सिंह उर्फ राजा भैया ने समाजवादी पार्टी का दामन थामा और जीत दर्ज की थी. साल 2001 में भारतीय जनता पार्टी के बृजभूषण सिंह ने सपा के कीर्तिवर्धन सिंह को हरा कर अपना परचम लहराया. साल 2005 में कीर्तिवर्धन सिंह ने समाजवादी पार्टी से चुनाव लड़ा और निर्वाचित घोषित हुए.साल 2009 में बेनी प्रसाद वर्मा कांग्रेस से जीते थे. साल 2014 और 2019 में कीर्तिवर्धन सिंह ने भारतीय जनता पार्टी से जीत दर्ज की.

गोण्डा का जातीय समीकरण

गोण्डा लोकसभा सीट पर 2 लाख से अधिक ब्राह्मण और 2 लाख से अधिक ठाकुर वोट हैं। इसके अलावा इस सीट पर करीब साढ़े तीन लाख मुस्लिम वोटर और ढाई लाख से अधिक कुर्मी वोटर हैं। इस सीट पर दलित वोटरों की भी निर्णायक भूमिका है। इनकी संख्या भी करीब ढाई लाख है।

विधानसभा सीटों का गणित

गोण्डा लोकसभा क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली सभी पांच विधानसभाओं में गोण्डा सदर, मेहनौन, ,मनकापुर, उतरौला, गौरा में बीजेपी के विधायक हैं गोण्डा सदर से बाहुबली बृजभूषण शरण सिंह के पुत्र प्रतीक भूषण सिंह, महनौन से विनय कुमार द्विवेदी, मनकापुर से रामपति शास्त्री, गौरा से प्रभात कुमार वर्मा और उतरौला से बीजेपी के ही रामप्रताप उर्फ शशिकांत वर्मा विधायक हैं !

सियासी रुझान

भारतीय जनता पार्टी ने मौजूदा सांसद कीर्तिवर्धन सिंह पर एक बार फिर से भरोसा जताते हुए एनडीए उम्मीदवार के रूप में उनको मैदान में उतारा है तो वही इंडिया गठबंधन ने गोण्डा लोकसभा सीट से समाजवादी पार्टी की युवा नेत्री व पूर्व केंद्रीय मंत्री स्वर्गीय बेनी प्रसाद वर्मा की पौत्री श्रेया वर्मा को अपना उम्मीदवार बनाया है जिस प्रकार से इस सीट का जातीय समीकरण है. राजनीतिक जानकारों का मानना है कि इस सीट पर इंडिया गठबंधन बनने के बाद कांग्रेस के प्रत्याशी न देने की स्थिति में श्रेया वर्मा की स्थिति भी जहाँ एक तरफ काफी हद मजबूत बतायी जा रही है.
तो वही लगातार दो बार से गोंडा में जीत का ताज पहनने वाले कीर्ति वर्धन सिंह भी पूरे दमखम के साथ मैदान में है और दूसरे खेमे का यह कहना है कि प्रदेश की योगी और देश की मोदी सरकार की कार्यशैली को देखते हुए जन समर्थन पुनः एक बार राजा साहब के पक्ष में होंगा. किंतु गोंडा सीट से बाजी कौन मारेगा यह तो आगामी 4 जून को ही नतीजों के बाद ही स्पष्ट हो पाएगा

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