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कृषि यन्त्र पर जीएसटी (GST) क्यों?

जीएसटी (GST) क्या है?

GST (Goods and Services Tax) एक ऐसा टैक्स है जो भारत में प्रॅाडक्ट और सर्विस की सप्लाई पर लगता है, जीएसटी GST एक इनडायरेक्ट टैक्स है। इसको वैराईटी ऑफ प्रीवियस इनडायरेक्ट टैक्स (वैट), सर्विस टैक्स, परचेज टैक्स, एक्साइज ड्यूटी और पिछले कई इनडायरेक्ट टैक्स को रिप्लेस करने के लिए 2017 में लागू किया गया था ।

जीएसटी (GST) हमेशा से बहस का मुद्दा रहा है, लोगो का यह मानना है की इससे महंगाई बढ़ी है और आम आदमी के लिए ये सही नहीं है।

यहाँ हम जीएसटी (GST) और किसानो के बिच क्या सम्बन्ध है इस पर बात करेंगे, ” नफरतों के तीर खाकर दोस्तों के शहर में हमने किस किस को पुकारा यह कहानी फिर सही” यह लाइन सरकार और किसान के बिच की स्थिति को समझाने के लिए काफी है, जो भी सरकार बनती है उसका यही दावा होता है की वो किसानो के लिए काम कर रही है किसानो की हितैषी है लेकिन सवाल यह उठता है की सरकारे किसान के लिए करती क्या है।

कृषि यन्त्र पर जीएसटी (GST) क्यों?

प्रत्येक उत्पाद पर जीएसटी (GST) का प्रतिशत अलग अलग है, यहाँ यह बात समझने वाली है की कृषि उपकरण को जीएसटी (GST) के दायरे में क्यों रखा गया है।

जो अन्नदाता सबका पालनहार है उससे जीएसटी (GST) की वसूली क्यों, आईये आपको बताते है की किसान को किस उपकरण पर कितना जीएसटी (GST) देना पड़ता है।

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जुताई के काम आने वाले कृषि यंत्रों जैसे हार्वेस्टिंग या थ्रेसिंग मशीन, इसमें पुआल या चारा बेलर मशीन भी शामिल है, घास व झाड़ियों को काटने की मशीन, यांत्रिक या तापीय उपकरणों से युक्त अंकुरण संयंत्र सहित अन्य प्रकार के कृषि यंत्रों पर 12 प्रतिशत की दर से जीएसटी देना होता है।

इसके अलावा फलों या अन्य कृषि उपज की सफाई, छंटाई या ग्रेडिंग की मशीनों, बीज, अनाज या सूखी फलीदार सब्जियों की सफाई, छंटाई या ग्रेडिंग की मशीनों पर सबसे ज्यादा 18 प्रतिशत की दर से जीएसटी लगता है।

इतना ही नहीं ट्रेक्टर जैसे मुख्य किसानी यन्त्र पर भी 12% का जीएसटी (GST) लगता है, ट्रेक्टर सबसे ज्यादा उपयोग किया जाना वाला किसानी उपकरण है ऐसे में इस पर जीएसटी का अतिरिक्त कर सही नहीं है।

जब उत्तर प्रदेश के कृषि मंत्री से इस सम्बन्ध में बात करने की कोशिश की गई तो उन्होंने गोल मोल जवाब देकर इस बात को टाल दिया लेकिन यह एक गंभीर सवाल है, कृषि मंत्री ने बताया कि भारतीय संविधान के अनुच्छेद 279 (A) की उपधारा 4 के अंतर्गत वस्तुओं पर कर की दरों में संशोधन के संबंध में जीएसटी काउंसिल द्वारा निर्णय लिया जाता है।

इस काउंसिल में सभी राज्यों एवं केंद्र सरकार का प्रतिनिधित्व है। जीएसटी की दरों में किसी प्रकार के परिवर्तन के संबंध में निर्णय काउंसिल की बैठक में विचार-विमर्श के बाद ही लिए जाते हैं। अब आप देखिये की 7 लाख के ट्रेक्टर पर अतिरिक्त 84,000 का शुल्क किसानो पर लगाना कहाँ तक सही है।

कृषि मंत्री ने बताया कि हाथ से या पशु चालित कृषि उपकरण जैसे- कुदाल, फावडे, मटके, गैंती, कांटे और रेक, कुल्हाड़ी, बिल हुक, हंसिया, घास काटने का चाकू, बाड़ काटने की कैंची, लकड़ी की कीलें आदि कृषि उपकरणों को जीएसटी से बाहर रखा गया है।

इन यंत्रों की खरीद पर किसानों को जीएसटी नहीं देना होता है, बात सही है मंत्री जी लेकिन इन सभी चीजों की कीमत पहले से ही बहुत कम है और बहुत सारी चीजें किसान खुद तैयार कर लेता है ऐसी स्थिति में ये बहुत जरुरी है की ट्रेक्टर को जीएसटी (GST) के दायरे से बाहर किया जाए।

किसान सत्ता हमेशा किसानो के ज्वलंत मुद्दे उठाता है, यह भी एक बड़ा मुद्दा है, किसान को कृषि यंत्रो पर किसी भी तरह से लगने वाले कर से मुक्ति किआ जाए।

चलते चलते एक आकड़ा दे देते है की देश में हर साल लाखो लोग आत्महत्या करते है इसमें से हर चौथा व्यक्ति किसान है, और इस आत्महत्या की मुख्य वजह कर्ज है, उसमे से 30% मामले केवल ट्रेक्टर, यन्त्र, बीज, खाद पर लिए गए लोन  है।

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