होमसमाचारमहाभारत के बाद महादेव पांडवों से क्यों थे नाराज

महाभारत के बाद महादेव पांडवों से क्यों थे नाराज

महाभारत का युद्ध समाप्त होने के बाद युधिष्ठिर अपने चारों भाइयों के साथ भगवान श्री कृष्ण से मिलने जाते हैं। पांचो भाइयों को चिंतित देख श्री कृष्णा उनसे उनकी चिंता का कारण पूछते हैं। उनके पूछने पर युधिष्ठिर कहते हैं, माधव हमने अपने ही भाइयों की हत्या की है और हमें इस बात का खेद है, अब आप ही बताइए हम सब हत्या के पाप से कैसे मुक्ति पा सकते हैं। देवकीनंदन यह सुनकर उन्हें महादेव के पास जाने को कहते हैं। वह उनसे कहते हैं कि एक महादेव ही है जो उन्हें इस हत्या के पाप से मुक्ति दिला सकते हैं। वह आगे बताते हैं कि महादेव उन सभी से अत्यंत रुष्ट हैं। तब पांचो भाई श्री कृष्ण से कहते हैं कि वह बिना महादेव के दर्शन किए हस्तिनापुर वापस नहीं लौटेंगे और वह महादेव के दर्शन करने हेतु काशी की ओर चल देते हैं।

कुछ दिनों बाद जब पांचो भाई काशी पहुंचते हैं तो शिव जी उन्हें वहां नहीं मिलते। इससे पांचो भाई बेहद परेशान हो जाते हैं और उनको ऐसा एहसास होता है कि महादेव उनसे काफी रुष्ट हैं। इतने में ही वहां श्री कृष्णा प्रकट हो जाते हैं। श्री कृष्णा उनको बताते हैं कि महादेव उनसे अत्यंत रुष्ट हैं, और वह उनका दर्शन नहीं देना चाहते हैं। तब अर्जुन श्री कृष्ण से पूछते हैं कि अब उनको इस हत्या के पाप से मुक्ति कैसे मिलेगी । गोविंद कहते हैं कि महादेव उनको दर्शन नहीं देना चाहते हैं और इसी कारण वह काशी से अपने प्रिय स्थल केदार चले गए हैं और अगर उनको भी महादेव के दर्शन करने हैं तो उन्हें भी केदार जाना होगा। श्री कृष्ण की बात सुनते ही पांचो पांडव यह निर्णय कर लेते हैं कि वह सब केदार जाएंगे और वहां महादेव के दर्शन करें करने के पश्चात ही हस्तिनापुर वापस लौटेंगे।

कुछ दिन बाद पांचो पांडव केदार पहुंचते हैं। महादेव पांडवों को आता देख खुद को बेल के रूप में परिवर्तित कर लेते हैं, और वहां खड़ी बैल और गायों के झुंड में शामिल हो जाते हैं। जब पांडव वहां पहुंचते हैं, तो वे सब महादेव को ढूंढने लगते हैं। तभी भीम की नजर वहां खड़ी बैल और गायों के झुंड पर पड़ती है। उसमें से एक बैल बाकी बैलों से काफी अलग नजर आ रहा होता है। वह उसे देखकर आश्चर्य में पड़ जाते हैं। भीम को ज्ञात हो जाता है कि भोलेनाथ ने उन्हें दर्शन न देने के लिए बैल का रूप धारण किया है। वह अपने चारों भाइयों को यह बात बताते हैं। तभी भीम अपना विशाल रूप धारण कर अपने दोनों पांव पहाड़ों के बीच फैला लेते हैं। वह अपने भाइयों से कहते हैं कि अब अन्य सारे पशु उनके पैरों के बीच से चले जाएंगे, लेकिन महादेव ऐसा नहीं करेंगे और हुआ भी ऐसा ही जैसा भीम ने अपने भाइयों से कहा था। वहां खड़े सारे जानवर भीम के पांव के बीच से होकर वहां से चले जाते हैं, सिर्फ एक बैल वहां रह जाता है। यह देख चारों पांडव शिवजी को पहचान लेते हैं। शिवजी को जैसे ही पता चलता है कि पांचो पांडवों ने उन्हें पहचान लिया है वह धरती के अंदर अंतर्धान होने लगते हैं। तब ही भीम उनकी पीठ का त्रिकोणात्मक भाग पकड़ लेते हैं और शिवजी अपने वास्तविक रूप में उनके सामने प्रकट हो जाते हैं। भोलेनाथ पांडवों से कहते हैं कि वह उनकी भक्ति को देखकर उनसे अत्यंत प्रसन्न हुए हैं और वह सभी पांडवों को हत्या के पाप से मुक्त कर देते हैं। इतने में ही वहां श्री कृष्णा प्रकट हो जाते हैं और वह महादेव से कहते हैं कि जब वह धरती में अंतर्धान हो रहे थे तब उनकी पीठ का भाग वहीं स्थापित हो गया था, इसलिए अब वह युगों युगों तक यहां केदारनाथ के रूप में पूजे जाएंगे।

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