Nirahua या धर्मेंद्र किसके सिर सजेगा जीत का ताज ?

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Who will win azamgarh Nirahua or Dharmendra
Who will win azamgarh Nirahua or Dharmendra

:: आजमगढ़ लोकसभा का अपडेट ::

Nirahua या धर्मेंद्र किसके सिर सजेगा जीत का ताज?
आजमगढ़ लोकसभा सीट उत्तर प्रदेश की प्रमुख सीटों में से एक है. यहां की राजनीति का असर राज्य की राजनीति पर भी देखने को मिलता है.बीजेपी ने इस सीट से निरहुआ को टिकट दिया है, वहीं इंडिया गठबंधन की ओर से सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने अपने चचेरे भाई धर्मेंद्र यादव को एक बार फिर से आजमगढ़ के सियासी रण में उतारा है .
कहते हैं दिल्ली जाने का रास्ता यूपी से होकर गुजरता है. 80 लोकसभा सीट वाले इस राज्य पर जिस भी पार्टी का दबदबा रहा है वह केंद्र की सत्ता में काबिज हुई है. उत्तर प्रदेश की राजनीति बड़ी ही दिलचस्प रही है. हो भी क्यों न? इस राज्य ने देश को पंद्रह में से नौ प्रधानमंत्री दिए. वहीं इस राज्य की बात करें तो उत्तर प्रदेश की सियासत का केंद्र कहीं न कहीं आजमगढ़ लोकसभा सीट रही है. समाजवादी पार्टी का गढ़ मानी जाने वाली इस सीट पर फिलहाल बीजेपी का कब्जा है. इस सीट से मुलायम सिंह यादव और अखिलेश यादव जैसे दिग्गज चुनाव लड़ चुके हैं और यहां से सांसद रहे हैं.

मुस्लिम-यादव फैक्टर रहा हावी

आजमगढ़ के सियासी इतिहास की बात करें तो इस लोकसभा सीट पर हमेशा से एमवाई यानी मुस्लिम-यादव फैक्टर हावी रहा. इसका अंदाजा इस बात से ही लगाया जा सकता है कि यहां अभी तक हुए 20 बार के लोकसभा चुनाव में 17 बार मुस्लिम-यादव कैंडिडेट ने जीत दर्ज की है. वहीं सिर्फ यादव की बात करें तो 14 बार यादवों ने यहां से सांसदी प्राप्त की है. जबकि मुस्लिम प्रत्याशी तीन बार सांसद बनने में कामयाब हुए हैं.

कब किस दल को मिली विजयश्री

वहीं दलों के हिसाब से बात करें तो आजमगढ़ में अभी तक हुए कुल 20 बार के लोकसभा चुनाव में 7 बार कांग्रेस, 4 बार सपा, 4 बार बसपा, 2 बार बीजेपी, 1 बार जनता पार्टी, 1 बार जनता पार्टी (सेक्युलर) और जनता दल ने चुनाव जीता. आजादी के बाद से आपातकाल के बीच हुए पांचों चुनाव में यहां कांग्रेस का कब्जा रहा. आपातकाल के बाद 1977 में यहां पहली बार जनता पार्टी का प्रत्याशी जीता. इसके बाद 1978 में हुए उपचुनाव में एक बार फिर कांग्रेस की वापसी हुई. 1980 के चुनाव में जनता पार्टी (सेक्युलर) और 1984 के चुनाव फिर से कांग्रेस विजयी रही. आजमगढ़ लोकसभा सीट पर यह कांग्रेस की आखिरी जीत थी.

इसके बाद हुए 1989 के चुनाव में पहली बार बसपा ने अपना परचम लहराया. 1991 में जनता दल और 1996 में सपा के उम्मीदवार रमाकांत यादव ने यहां से जीत दर्ज कर पार्टी की इस सीट पर एंट्री हुई. इसके बाद 1998 में बसपा के खाते में जीत गई और अकबर अहमद यहां से सांसद बने. इसके बाद 1999 और 2004 के चुनाव में रमाकांत लगातार दो बार सांसद बने, 1999 में सपा से और 2004 में बसपा से चुने गए.

2008 में रमाकांत यादव की सदस्यता समाप्त होने पर एक बार फिर चुनाव हुए. इस बार बसपा से अहमद अकबर ने बाजी मारी. हालांकि, 2009 के चुनाव में रमाकांत यादव ने फिर से सांसदी जीत ली, लेकिन वे इस बार बीजेपी से चुने गए. 2009 के चुनाव में पहली बार बीजेपी की आजमगढ़ लोकसभा सीट में एंट्री हुई. इसके बाद 2014 के चुनाव में समाजवादी दिग्गज नेता मुलायम सिंह यादव यहां से सांसद चुने गए.
2019 के चुनाव में अखिलेश यादव आजमगढ़ के सांसद बने. इसके बाद 2022 में अखिलेश के विधायक बनने के बाद उन्होंने सांसद पद से इस्तीफा दे दिया. इसके बाद हुए उपचुनाव में बीजेपी से दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ ने बाजी मारी और यहां से सांसद बने. बीजेपी ने एक बार फिर निरहुआ पर भरोसा जताया है और उन्हें लोकसभा का टिकट दिया है. तो वही इंडिया गठबंधन की ओर से धर्मेंद्र यादव को प्रत्याशी बनाया गया है अब यह देखना होगा कि बसपा की ओर से इस बार उम्मीदवार कौन होगा.

गुड्डू जमाली अब साइकिल पर सवार

इंडिया गठबंधन के उम्मीदवार धर्मेंद्र यादव को इस बार सियासी लाभ होने के बहुत आसार हैं इसका मुख्य कारण यह माना जा रहा कि आजमगढ़ सपा का गढ़ रहा है. दूसरा मुख्य कारण यह निकल कर आ रहा कि 2022 के उपचुनाव में सपा के हारने का कारण तत्कालीन बसपा प्रत्याशी गुड्डू जमाली थे. उनके चुनाव लड़ने से मुस्लिम वोटों में बंटवारा हुआ था, जिसका फायदा बीजेपी प्रत्याशी निरहुआ को हुआ.

लेकिन, अब गुड्डू जमाली के सपा में आने की वजह से मुस्लिम वोट फिर से सपा की तरफ जा सकते हैं. ऐसे में एमवाई समीकरण एक बार फिर मजबूत होता दिख रहा है. राजनीतिक जानकारों के मुताबिक इसका फायदा निश्चित रूप से इण्डिया गठबंधन को मिलेगा .

मुस्लिम-यादव मतदाता बाहुल्य

आजमगढ़ लोकसभा क्षेत्र में गोपालपुर, सगड़ी, मुबारकपुर, आजमगढ़ सदर और मेहनगर विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं. वहीं मतदाताओं की बात करें तो यहां करीब 19 लाख मतदाता हैं. जिनमें से करीब 26 फीसदी यादव वोटर, 24 फीसदी मुस्लिम वोटर और करीब 20 फीसदी दलित वोटर हैं.

सियासी रुझान
यदि आजमगढ़ लोकसभाक्षेत्र की बात की जाए तो लोकसभा के अंतर्गत आने वाली सभी विधानसभाओं में समाजवादी पार्टी काबिज है और यहां के समीकरण को देखते हुए राजनीतिक रणनीतिकार और यहां की जनता का भी
यही मानना है कि भाजपा प्रत्याशी दिनेश लाल यादव ‘निरहुआ’ और इंडिया गठबंधन के प्रत्याशी धर्मेंद्र यादव के बीच इस सीट पर कांटे की टक्कर होने की संभावना है !

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