Monday, May 20, 2024
होमNewsअयोध्या की "सियासी" राम कहानी

अयोध्या की “सियासी” राम कहानी

Ayodhya की “सियासी” राम कहानी

आज हम बात करेंगे उत्तर प्रदेश की राजधानी से सवा सौ किलोमीटर की दूरी पर स्थित मर्यादा पुरुषोत्तम भगवान श्रीराम की पावन नगरी अयोध्या(Ayodhya) लोकसभा की!यहां की सियासत भी एक अलग ही राम कहानी कहती है उत्तर प्रदेश और देश ही नहीं बल्कि दुनिया में अयोध्या की अपनी एक अलग पहचान है साल 2024 की शुरुआत में ही प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी की उपस्थिति में राम मंदिर की प्राण प्रतिष्ठा संपन्न हुई, वैसे तो अयोध्या अपनी पहचान का मोहताज नहीं है किंतु प्राण प्रतिष्ठा से अयोध्या की चर्चा देश ही नहीं दुनिया में खूब हुई! आज हम आपको रूबरू करायेंगे अयोध्या के सियासी समीकरण से, ताजा राजनीतिक आब-ओ-हवा से लेकर कई अनजान पहलुओं से!
उत्तर प्रदेश की सियासी तासीर समझने वाले व्यक्ति के मन में जिज्ञासा होती है अयोध्या को जानने की । पांच-दस साल पहले की अयोध्या जिसने भी देखी होगी वह आज की अयोध्या देखकर चकित हुए बगैर नहीं रहने वाला। चारों तरफ भगवान श्रीराम के नाम अंकन वाले भगवा झंडे लहराते श्रद्धालुओं का रैला अब यहां रोज नजर आता है।

वर्तमान सांसद

अयोध्या (Ayodhya) लोकसभा सीट जो कि आज भी फैजाबाद के नाम से ही जानी जाती है और यहां से भारतीय जनता पार्टी के लल्लू सिंह सांसद हैं जो कि कई चुनाव लड़ने के बाद सन 2014 की मोदी लहर में भगवा लहराने में कामयाब रहे और देश की संसद में फैजाबाद का प्रतिनिधित्व कर रहे हैं!

बहुप्रतीक्षित राम मंदिर निर्माण का फैक्टर

लगभग पाँच दशक के लंबे संघर्ष के पश्चात अब अयोध्या में भव्य राम मंदिर का निर्माण हो चुका है जहां पर एक तरफ 22 जनवरी को प्रधानमंत्री ने प्राण प्रतिष्ठा के कार्यक्रम से ही चुनावी शंखनाद कर दिया तो वहीं समाजवादी पार्टी ने कांग्रेस के साथ गठबंधन कर चुनावी मैदान में है अब देखना यह है कि राम मंदिर निर्माण का असर कितना दिखता है और कौन सा राजनीतिक दल इसका अधिक लाभ ले पाता है, यहां भी विपक्षी दलों की अपनी रणनीति है। भाजपा से मुकाबले में इस बार कांग्रेस और समाजवादी पार्टी एकजुट दिख रही है।

कब किस दल को मिली विजयश्री

फैज़ाबाद लोकसभा सीट पर पहली बार 1952 में चुनाव हुआ और कांग्रेस के पन्ना लाल यहां से सांसद बने.1957 में हुए चुनाव में बृजवासी यहां से सांसद बने.1967 में हुए चुनाव में कांग्रेस से आर.के सिन्हा यहां से सांसद चुने गए.सिन्हा 1971 में भी सांसद बने. लेकिन 1977 के चुनाव में भारतीय लोकदल के अनंत राम यहां से सांसद बने. 1980 में कांग्रेस के जयराम वर्मा दोबारा यहां कांग्रेस की वापसी कराने में सफल रहे. 1984 में कांग्रेस के निर्मल खत्री यहां से सांसद बने लेकिन 1889 के चुनाव में सीपीआई की मित्रा सेन ने यहाँ से चुनाव जीता.
राम मंदिर की लहर में 1991 के चुनाव में विनय कटियार ने बीजेपी को पहली बार जीत दिलाई. इसके बाद 1996 में भी विनय कटियार यहां से सांसद चुने गए थे लेकिन 1998 के चुनाव में सपा के हाथों विनय कटियार को हार का सामना करना पड़ा. हालांकि 1999 में वो एक बार फिर चुनाव इस सीट को भाजपा की झोली में डालने में सफल रहे. 2004 में बसपा से मित्रसेन यादव यहां से चुनाव जीते. इसके बाद 2009 में कांग्रेस से निर्मल खत्री उतरे और सासंद चुने गए. 2014 के लोकसभा चुनाव में बीजेपी ने लल्लू सिंह को उतारा और सफलता पाई. जिसके बाद 2019 में हुए लोकसभा चुनाव में एक बार फिर भाजपा के लल्लू सिंह ने यहां से जीत दर्ज की थी और अभी भी लल्लू सिंह लोकसभा में फैजाबाद का प्रतिनिधित्व करते हैं!

विधानसभाओं का गणित

फैजाबाद (Ayodhya) लोकसभा क्षेत्र में विधानसभा की 5 सीटें आती हैं.. जिनमें दरियाबाद, बीकापुर, रुदौली, अयोध्या और मिल्कीपुर की सीटें शामिल है. इसमें दरियाबाद की सीट बाराबंकी जिले में आती है.
अगर 2022 में हुए विधानसभा चुनाव के आंकड़ों पर नजर डालें तो.मिल्कीपुर विधानसभा पर समाजवादी पार्टी ने जीत दर्ज की थी तो वहीं रुदौली, बीकापुर, अयोध्या और दरियाबाद विधानसभा सीटें भाजपा के खाते में गई थी. इससे पहले हुए 2017 के विधानसभा चुनाव में भाजपा ने सभी सीटों पर जीत दर्ज की थी. तो वहीं समाजवादी पार्टी, बसपा और कांग्रेस को यहां पराजय का सामना करना पड़ा था।

फैजाबाद सीट पर कुल मतदाता

2019 लोकसभा चुनाव के अनुसार फैजाबाद सीट पर मतदाताओं की संख्या 18 लाख 4 हज़ार 729 थी जिनमें पुरूष मतदाताओं की संख्या 9 लाख 64 हज़ार 426 थी. और महिला मतदाताओं की संख्या 8 लाख 40 हज़ार 231 थी. वहीं ट्रांस जेंडर मतदाताओं की संख्या 72 थी।

लोकसभा चुनाव 2019 के नतीजे

2019 में हुए लोकसभा चुनाव में भाजपा के लल्लू सिंह ने समाजवादी पार्टी के आनंद सेन यादव को 65 हजार 477 वोटों के अंतर से मात दी थी.भाजपा के लल्लू सिंह को कुल 5 लाख 29 हजार 21 वोट मिले थे. तो वहीं सपा के आनंद सिंह को कुल 4 लाख 63 हजार 544 वोट मिले थे…कांग्रेस के डॉ. निर्मल खत्री 53 हजार 386 वोटों के साथ तीसरे नंबर पर रहे थे। यदि मत प्रतिशत की बात करें तो भाजपा को 48.66%, सपा को 42.64%, तो वहीं कांग्रेस को 4.91% वोट मिले थे!

लोकसभा चुनाव 2014 के नतीजे

2014 में हुए लोकसभा चुनाव में बीजेपी के लल्लू सिंह ने चुनाव जीता था.लल्लू सिंह को कुल 4 लाख 91 हज़ार 761 वोट मिले थे. वहीं सपा के मित्र सेन यादव को कुल 2 लाख 8 हज़ार 986 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर बसपा के जितेंद्र कुमार सिंह थे जितेंद्र को कुल 1 लाख 41 हज़ार 827 वोट मिले थे, 2014 के लोकसभा चुनाव में भाजपा को 48.08%, सपा को 20.43%, बसपा को 13.87% तो वहीं कांग्रेस को 12.70% मत हासिल हुए थे!

लोकसभा चुनाव 2009 के नतीजे

2009 में हुए लोकसभा चुनाव में कांग्रेस नेता निर्मल खत्री ने यहां से चुनाव जीता. निर्मल खत्री को कुल 2 लाख 11 हजार 543 वोट मिले थे. वहीं दूसरे नंबर पर सपा के मित्रसेन यादव रहे.मित्रसेन को इस चुनाव में कुल 1 लाख 57 हज़ार 315 वोट मिले. तीसरे नंबर पर बीजेपी के लल्लू सिंह रहे. लल्लू सिंह को कुल 1 लाख 51 हज़ार 558 वोट मिले थे!

लोकसभा चुनाव 2004 के नतीजे

साल 2004 के लोकसभा चुनाव में मित्रसेन यादव बसपा से चुनाव लड़े और चुनाव जीते. मित्रसेन यादव को इस चुनाव में कुल 2 लाख 7 हज़ार 285 वोट मिले. वहीं दूसरे नंबर पर बीजेपी के लल्लू सिंह रहे. लल्लू सिंह को इस चुनाव में 1 लाख 73 हज़ार 799 वोट मिले थे. तीसरे नंबर पर सपा से अशोक कुमार सिंह रहे. अशोक कुमार को कुल 1 लाख 37 हज़ार 148 वोट मिले थे!

फैजाबाद लोकसभा का जातिगत समीकरण

तो यहां पर तकरीबन 84 फीसदी आबादी हिंदू है. यहां सबसे अधिक ओबीसी मतदाता हैं, जिनकी संख्या लगभग 26 फीसदी बताई जाती है. इसमें लगभग 13 फीसदी के करीब यादव मतदाता हैं.सामान्य वर्ग के मतदाताओं की संख्या 29 फीसदी से अधिक मानी जाती है. भाजपा ने एक बार फिर से लल्लू सिंह पर भरोसा जताते हुए उन्हें फैजाबाद से चुनावी मैदान में उतारा है.देखना दिलचस्प होगा कि इस चुनावी घमासान में जीत हासिल कर दिल्ली कौन पहुंचता है?

बीते दस वर्षों से काबिज है भाजपा

फैजाबाद सीट से 2014 से भाजपा जीत रही है। इससे पहले 2009 में कांग्रेस जीती थी। इससे पहले यहां से बसपा, भाजपा और सपा के सांसद चुने जा चुके हैं। फैजाबाद लोकसभा क्षेत्र में कुल पांच विधानसभा सीटें आती हैं। कांग्रेस-सपा गठबंधन के प्रत्याशी ने प्रचार शुरू कर दिया है तो वहीं भारतीय जनता पार्टी ने मौजूदा सांसद 2014 और 2019 का चुनाव जीत चुके लल्लू सिंह पर एक बार पुनः भरोसा जताया है!

सपा ने अपने वयोवृद्ध नेता पर लगाया दांव

इस लोकसभा क्षेत्र में चार विधानसभा क्षेत्र अयोध्या जिले के और एक विधानसभा क्षेत्र बाराबंकी जिले का आता है। रामलला की प्राण प्रतिष्ठा होने के बाद भाजपा देशभर में इसे अपनी उपलब्धि के रूप में प्रचारित करने में जुटी है। जाहिर है वोट मांगने का बड़ा माध्यम भी यही है। अभी फैजाबाद से भाजपा के लल्लू सिंह सांसद हैं। समाजवादी पार्टी ने यहाँ भाजपा का विजय रथ रोकने के लिए पूर्व मुख्यमंत्री मुलायम सिंह के करीबी रहे अवधेश प्रसाद पर दांव लगाया है। अवधेश प्रसाद अयोध्या जिले की मिल्कीपुर सीट से विधायक हैं। वे 9 बार विधायक और कई बार मंत्री रह चुके हैं। उन्हें पिछड़ा, दलित और अल्पसंख्यक फार्मेूले का चेहरा माना जाता है। गठबंधन होने के बाद कांग्रेस भी सपा के साथ हो गई है। मोदी का दौरा पहले ही हो चुका है। भाजपा मंदिर निर्माण में अड़चनें लगाने के लिए सपा को घेर रही है।

दलों की प्रतिष्ठा से जुड़ी फैजाबाद सीट

इस बार का चुनाव अन्य चुनावों से अलग है। केसरिया रंग में रंगी इस सीट से भाजपा की भी प्रतिष्ठा जुड़ी हुई। आखिर अयोध्या में क्या होगा? इस पर सबकी नजर है फैजाबाद में बड़ी संख्या में मुस्लिम मतदाता भी हैं। यादव मतदाता भी यहां हैं। ऐसे में सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने पुराने प्रत्याशी का टिकट काटकर अनुभवी राजनेता को मैदान में उतारा है। दोनों दलों की प्रतिष्ठा से जुड़ी फैजाबाद सीट पर रोचक मुकाबला होना तय है। अयोध्या के माध्यम से भाजपा ने पूरे देश में संदेश दिया है। राम मंदिर इस बार प्रमुख मुद्दा है। ऐसे में भाजपा इस सीट को किसी भी सूरत में खोना नहीं चाहती है। रामलहर में भाजपा का विजय रथ रोकना विपक्ष के लिए टेढ़ी खीर साबित हो सकती है किंतु समाजवादी पार्टी ने अवधेश प्रसाद जैसे कद्दावर नेता को यहां से उम्मीदवार बनाकर अयोध्या के राजनीतिक लड़ाई को रोचक कर दिया है!

सियासी रुझान

फैजाबाद लोकसभा सीट का जहां तक सवाल है यहां पर भाजपा के वर्तमान सांसद लल्लू सिंह हैं जो कि पिछले दो कार्यकाल से सन 2014 से लेकर अभी तक इस सीट पर काबिज हैं, समाजवादी पार्टी और कांग्रेस गठबंधन में इस बार लोकसभा का चुनाव लड़ रही है जिसमें प्रत्याशी के रूप में मुलायम सिंह यादव के करीबी रहे वयोवृद्ध समाजवादी पार्टी के नेता अवधेश प्रसाद तो वहीं लोकसभा निर्वाचन क्षेत्र के अंतर्गत आने वाली चार विधानसभा सीटों पर भाजपा काबिज है दरियाबाद से भाजपा विधायक सतीश शर्मा जो कि योगी सरकार में मंत्री भी हैं तथा अयोध्या के महापौर पं० गिरीश पति त्रिपाठी तो वही रुदौली के विधायक रामचंद्र यादव भी लल्लू सिंह के पक्ष में भारतीय जनता पार्टी को हैट्रिक लगवाने के लिए जनता के बीच जाकर समर्थन मांग रहे हैं इस सीट पर जहां भाजपाइयों ने लल्लू सिंह को तीसरी बार सांसद बनाने के लिए कमर कस ली है तो वही अवधेश प्रसाद के पक्ष में कांग्रेस की यूनिट समेत प्रदेश सरकार में पूर्व मंत्री रहे पवन पांडेय सहित कई दिग्गज समाजवादी नेता भी समर्थन के लिए जनता के बीच में हैं देखना दिलचस्प होगा कि आगामी 2024 के लोकसभा चुनाव में इस जमीन से जीत दर्ज कर लोकसभा में फैजाबाद का प्रतिनिधित्व कौन करता है!

अयोध्या की “सियासी” राम कहानी- Tweet This?

RELATED ARTICLES

कोई जवाब दें

कृपया अपनी टिप्पणी दर्ज करें!
कृपया अपना नाम यहाँ दर्ज करें

- Advertisment -
Sidebar banner

Most Popular

Recent Comments